मै अपनी बदनामी के कलंक को,
मिटाऊं कैसे
मै निर्दोष सी, मासूम सी निरपराध को,
बताऊँ कैसे
बदनाम करने वाले इस दुनिया को
बदनाम करने वाले इस दुनिया को
कैसे बताऊँ की, मै निर्दोष हूं
अरे, कलंक तो सीता पे लगा था
परन्तु, शाजिश तो रावण ने ही रचा था
कैसे बताऊँ की मै निर्दोष हूं
अरे, कलंक तो द्रोपदी पे भी लगा था
परन्तु, शाजिश तो दुर्योधन ने ही रचा था......
-Durga (Diya)
©diyadeepak
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