कोई हो जो हमसे गुफ्तगू कर ले
हाल क्या है दिल की जुस्तजू कर ले।
क्या सितम है मेरे साथ बज्म-ओ-बहार नहीं
सितमगर आके तू कोई फिर सितम कर ले।
बेरहम है साथ अब आब-ओ-हवा मेरे
इखलास की इंतजार है तू रूबरू कर ले।
शिशे सा नाजुक दिल टूट न जाए कहीं
अगर इजाजत हो शुरू नई जिंदगी कर ले।
शाम-ओ-सहर बस हो प्यार का आलम
इश्क़ की कश्ती से सफर चमन की कर ले।
बेजुबां है दिल मेरा ब्यां करू क्या दास्तां
इन जरिफ होठों से मुकम्मल दास्तां कर ले।
©anuragrahi
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