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कोरोना

कितने खौफनाक मंज़र है यहाँ तबाही के
घूटने टूटे सुपर शक्ति की तानाशाही के
कितने खौफनाक मंज़र है यहाँ तबाही के.
फंसी हुई दुनिया कैसे
अपने ही पांसो में
एक वायरस टहल रहा
आदम की सांसों में
अवरोधक लग गए
पांव में आवाजाही के
कितने खौफनाक मंजर है यहाँ तबाही के
सुनते हैं यमराज कहां
कब कोई भी बिनती
रोज यहाँ गिरती लाशों की
कौन करे गिनती
दिखते है ताबूत अनगिनत
यहां उगाही के
कितने खौफनाक मंजर है यहाँ तबाही के .
कहां गया ईश्वर बहुव्यापी
जग का विषपायी
एक वायरस ने दुनिया को
किया धराशायी
कुछ दिन में लोग मिलेंगे
नहीं गवाही के.
कितने खौफनाक मंजर है यहाँ तबाही के.
वल्गाएं थम गयीं
प्रगति की संध्या वेला है
यह दुनिया लगती जैसे
दो दिन का मेला है
कहां गए वे दिन
पहले - से सरितप्रवाही के.
कितने खौफनाक मंजर है यहाँ तबाही के.
रेले ठप , ठप हुई
हवाई सारी यात्राएं
घर में कैद सुनाएं
कैसे अपनी पीड़ाएं
तेल कान में डाल
सो रही नोकरशाही के.
कितने खौफनाक मंजर है यहाँ तबाही के.
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©pranjali