कब ,कैसे, किस प्रकार
कैसे करू तेरी कविता का सारांश,
न जाने किस सोच मे पर जाऊ
तेरी मिठी वाणी का सारांश;
तुम तो ऐसी गाती हो ,
मानो सुर मे कोई
पंख लग गये हो ;
तेरी आवाज को सुनकर
सभी लोग तुम्हे भाॅते है
परंतु आश्चर्य है मुझे कि
लोग तुम्हारे संगीत मे मरते क्यों है
तुम दिखने मे लगती हो काली ,
परंतु तुम्हारी आवाज की कोई बात नही
इस कारण मरते है लोग तुमपे
कहलाती हो पक्षियो की रानी ;
लेकिन तुम दिखने मे लगती हो काली
कलियुग मे मुझे नही पता कि
लोग किस पर मरते है
मोह पर या प्रेम पर
पर मै इतना कह सकता हू कि
दुनिया मे लोग मरते
है मोह पर , लेकिन
जिसमे न हो कोई चमत्कार
लोग करते है उसका तिरस्कार ।
आखिर क्यों होता है ऐसा,
मै तुमसे कहता हू
कैसे करोगे समाधान इसका
मै तुमसे पूछता हू ।
मेरी बातो का तुम बुरा मत मानना
पर मै प्रश्न पूछता ऐसा ही,
मेरी बातो का तुम अपनी ,
जिन्दगी मे लाकर देखना
कैसी होगी तेरी कहानी
मुझे भी समझ कर बताना ।
- शिव शंकर महतो
©shiv
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