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कुछ देर के लिए ही सही, हर रिश्ता भूल जाना चाहती हूँ, मैं माँ, बहन, बेटी, बहू की…

कुछ देर के लिए ही सही, हर रिश्ता भूल जाना चाहती हूँ,
मैं माँ, बहन, बेटी, बहू की बंदिशों से दूर जाना चाहती हूँ।
क्या चंद लम्हों के लिए भूल जाऊँ कि मैं एक लड़की हूँ?
आज बस खुद से मिलने और खुद में खो जाना चाहती हूँ।
जो दुनिया सजा रखी है मैंने सिर्फ अपने ही ख़यालों में,
उस ख़्वाब को कुछ देर के लिए हक़ीक़त बनाना चाहती हूँ।क्या ऐसा नहीं हो सकता...
कि घड़ी की सुइयाँ थम जाएँ, और मैं अपनी ही दुनिया में खो जाऊँ?
जहाँ मुझ पर किसी उम्मीद का बोझ न हो,
जहाँ मैं किसी के सवालों का जवाब न हूँ।
कुछ पल के लिए भूल जाऊँ ये समाज, ये दायरे, ये बंदिशें,
और बस एक आज़ाद परिंदा बन जाऊँ।
मेरे ख़्वाब जो बरसों से बंद हैं बंदिशों की दराज़ों में,
जी लूँ उन्हें हक़ीक़त में, और कुछ देर के लिए सच में ज़िंदा हो जाऊँ।

💞 Sona 💞