कुछ खामोश है बेजार सा दिल
कुछ रोता हुआ बेकार सा दिल
यूँ तो लाख इसके कहने को अपने यहाँ
पर फिर भी है गुमनाम भरे बाजार में दिल
कुछ दोष इसका भी रहा होगा
कुछ लफ्जों से इसने भी कहा होगा
होंगे कुछ किये शिकवे भी इसने
यूँ तो नहीं है तनहा रहा होगा
कुछ रोना इसका मुकदर भी होगा
कभी इसका कोई घर भी होगा
चला होगा फकत तलाश में उसकी
जिसने बदजात इसे भी कहा होगा
किया सा लगता प्यार भी इसने
सब लगता है लुटाये प्यार में दिल
दुनिया के इस मेले में भी
लगता किसी के इंतजार में दिल
कभी नुमाइश इसकी की होगी
कुछ फतवे भी तो पढ़े होंगे
किया होगा कलम अल्फाजों को इसके
यूँहीं नही है बेज़ुबान सा दिल
कुछ गुमसुम कुछ बेताब सा दिल
पर रोटा बेहिसाब सा दिल
©mukhar
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