जुड़ी है जिंदगी से मेरी,
कुछ जिंदगियां...
कद्र नहीं है,किसी को मेरी,
बस पैसे के पीछे भागती हैं, कुछ जिंदगियां...
प्यार ऐसे जताया जाता हैं जैसे मुझसे
हो,पीठ पीछे होती हैं बुराइयां मेरी,
2 रुपए देखे नहीं हाथ में,
मेरी हो जाती है,कुछ जिंदगियां...
हसकर बात करती है,
मुस्कुराकर बोलती है।
लगता है मेरे लिए है,और मेरी है
बस पैसे के पीछे भागती हैं,कुछ जिंदगियां...
सुख में साथ मुस्कुराती है,
दुख में भाग जाती है।
अपने रास्ते पर अकेला छोड़कर लड़ने को,
बीच राहो में तोड़ जाती है,कुछ जिंदगियां...
कहने को तो अपनाती है,
कुछ पल में बेगाना कर जाती हैं
सपने दिखाकर,
सपनों की ही दुनिया में डूबा जाती हैं,कुछ जिंदगियां...
देकर प्यार का प्याला हाथ में,
जहर पिला जाती है।
बुराई छिपाकर,अच्छाई का
मुखौटा पहन आती है,
डालकर मुश्किलों के ढेर में,
खुद से वाकिफ करा जाती है,कुछ जिंदगियां...
कुछ इस तरह मेरी,
जिंदगी से जुड़ी हैं,कुछ जिंदगियां...
©khempoitry
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