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कुछ तो लोग कहेगे

बाँध लकीरें अपने हाथों मे,
अपना भविष्य बनाना चाहती हूं....
लक्ष्य की डोर से अपनी पतंग उड़ाना चाहती हूं....
लगे परिश्रम कुछ लोगो को,
लगे मज़ाक कुछ लोगो को...

सबकी बातें नहीं सुनुँगी..
ये तो लोगो का कहना....
इसलिए,
कुछ तो लोग कहेगे...
कुछ तो लोग कहेगे....
-Durga(Diya)
©diyadeepak