कुदरत से कुछ भी नहीं है सुन्दर,
कुदरत की अदा से बनी फिज़ा,
इसे कोई नहीं सर्जन कर सकेगा,
कुदरत जो करे वह अलौकिक और मौलिक होता है...
इस पर कोई बहस या चर्चा से विपरीत साबित कर सकेगा...
कुदरत एक परम आधारभूत बुनियादी शक्ति है...
जिसे कोई बदल नहीं सकता...
©hemantjsha
H