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कुदरत का न्याय

प्रकृति के संग कर खिलवाड,
मनुष्य बहुत ही बना महान।
बुजुर्गों ने बहुत ही समझाया,
फिर भी उनके समझ ना आया।।
लडने को हो गये तैयार,
और चढा आधुनिकता का बुखार।
फिर आया खाँसी और जुकाम,
कुदरत बोली हो जाओ सावधान।।
लेकिन उससे कोई ना घबराया,
फिर मनुष्य ने विज्ञान का परचम लहराया।
बोले हम तो हैं बडे महान,
कर देगा सबकुछ विज्ञान।।
थोड़ा सा समय और बीता,
अब कुदरत ने हैजा भेजा।
लेकिन फिर भी समझ ना आया,
कोई जरा सा भी ना घबराया।।
फिर तो आया पलेग, मलेरिया और बुखार,
फिर डेंगू और चिकिनगुनिया ने लगाई गुहार।
देखो अब तो समझ जाओ,
नदियों को तुम मत सडाओ।।
पेडों को मत काटो तुम,
कूड़ा इतना मत फैलाओ।
नहीं तो खत्म हो जाएगा ये संसार,
फिर भी किसी ने ध्यान ना लगाया।।
फिर से टेक्नोलॉजी का गुणगान गाया,
अब क्या होना था इस बार।
ग्लोबल वार्मिंग का चढा बुखार,
पूरी पृथ्वी हुई बीमार।।
चारों तरफ मचा हाहाकार,
फिर भी उनको समझ ना आया।
केमिकल का बैंड बजाया,
विज्ञान हाईब्रिड फार्मिंग ले आया।।
सारी फसलें कीं बेकार,
फर्टिलाइजर का जहर मिलाया।
फिर केंसर की आई बहार,
फिर लाखों ने हाहाकार मचाया।।
हाय, कोई तो हमें बचाए,
लेकिन कोई कुछ ना कर पाया।
फिर प्रकृति मुस्कुराई,
और सूनामी का कहर लाई।।
कितने लोगों को फिर निपटाया,
फिर भी इनकी समझ ना आया।
पेडों से किया लगाव,
घर और फनीर्चर बनवाये।।
लेकिन सिर्फ पेड़ कटवाऐ,
कहीं कोई पेड़ ना लगाऐ।
एक बार फिर हुआ प्रहार,
त्राहि माम करे संसार।।
इस बार जंगल के पशु-पक्षी,
जमकर उनका किया शिकार।
शायद अब भी कुछ समझ में आए,
लेकिन वो तो मद में इतराए।।
इतना ज्यादा बडा अत्याचार,
कि खुद कुदरत ने उठाऐ कदम हजार।
इस बार तो हद ही हो गई,
सारी इंसानियत ही सो गई।।
चाइना नाम का एक देश महान,
चारों ओर करे अपना गुणगान।
आबादी यहाँ की बडी विशेष,
ना छोड़े कोई अवशेष।।
गाय, कुत्ता, सूअर, साँप और बिच्छू,
चूहा यहाँ तक कि कच्चा माँस।
खा डाले सारे जीव-जन्तु,
प्रकृति का करें उपहास।।
इस बार बारी चमगादड़ की आई,
पकडा उसको और चमगादड़ चबाई।
देखो फिर क्या हुआ परिणाम,
आया फिर एक रोग महान।।
कोरोना उसको कहता विज्ञान,
लेकिन फिर भी समझ ना आई।
और उसकी वेक्सीन बनवाई,
अरे! मेरे पढे लिखे भाई।।
अगर इतना ही काबिल है विज्ञान,
तो क्यों होता है विनाश बार-बार।
फिर तो मर ही ना पाता इंसान,
आत्मा का हो जाता उद्धार।।
जाकर बस एक इंजेक्शन लगवाता,
आक्सीजन की थी क्या जरूरत।
बस एक बैग- पैक लटकाता,
और सुबह-शाम उसी को खाता।।
इलेक्ट्रॉन, प्रोटोन और न्यूट्रॉन,
बस तुम यही पढते रहना।
कुदरत का सरल सा पाठ,
इसको तुम कभी ना पढना।।
अरे! जो पहले से ही है कुदरत का तौहफा,
उसमें तुमने क्या है खोजा।
खोजना है तो उसको खोजो,
जिससे किसी का हो कल्याण।।
जय प्रकृति,
जय ईश्वर की।
वो अद्भुत आलौकिक शक्ति,
जिसका ही है ये संसार।।
©319meenu