कविता है गीत, कविता है प्रेम-राग,
कविता से हीं करता हूं स्वागत का आगाज!
कविता है कवियों की जान, कविता है दिल का धड़कन,
कविता से हीं है वंदन तेरा अभिनन्दन !
कविता है खुश्बू , कविता है कानन का चंदन,
कविता से हीं आज है आपका हार्दिक अभिनन्दन!
कविता है ज्ञान-मान-सम्मान, कविता है कवियों की शान,
कविता से हीं है जगत में, कवियो की नव-किर्ति की पहचान !!!
---- संदीप कुमार "संजन""
भगवानपुर,अररिया,बिहार
©sanjan
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