बीते दिन -
याद रखूं कितना भी
बीते दिन नहीं आएगें ।
फिर से मेरे लिए पिता जी
खिलौने नहीं लाएंगे ।।
न लाएंगे छोटे कपड़े
न गोदी में उठाएंगे ।
ये सच है बीते दिन
अब क्या वापस आएंगे ...?
बात बात में रोना
अब क्या रोएं ।
बड़े हुए तो हम ही
अब कपड़े धोएं ।।
अब क्या दूध पिएंगे मा का
हम ही स्वयं लाजाएंगे ।
ये सच है बीते दिन
अब क्या वापस आएंगे ...?
अब क्या बुआ खिलाएंगी
गोदी में क्यों उठाएंगी ?
अब क्यों इतना प्यार करेगी
अपनापन क्यों दिखाएंगी ?
अब तो सब कोई न कोई
हमको काम बताएंगे ।
ये सच है बीते दिन
अब क्या वापस आएंगे .....?
लेखक कवि एवं गीतकार
जीतेन्द्र कानपुरी ( टैटू वाले)
9118837179
©soch
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