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क्या कहूं? कैसी हूं मैं 🤔

क्या कहूं कैसी हूं मैं।दीवानी हूं,खुद से बेगानी हूं,इस दुनिया से अनजानी हूं।खामोशी में रहती हूं,गुनगुनाने की आदी हूं ।ना सजने का शौक है,ना संवरने की आदी हूं!ख्वाबों कि शहजादी हूं,गुनगुनाने की आदी हूं। हां ऐसी हूं, मैं।रहती हूं यूं खोई सी,जैसे किसी की तलाश हो। हर पल किसी की आस हो।क्या कहूं? कैसी हूं मैं।किसी के लिए खास हूं ,किसी के लिए बकवास हूं।।जीवन की इस भीड़ भरी महफ़िल में ठहरी हुई हूं....। Bhavi
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