कभी समझ आता नहीं की
क्या लिखूँ,..
तुझ पर लिखूँ,..
या खुद पर लिखूँ...
तू समझ आ भी जाए...
मैं खुद को समझ पाती नहीं,
बिना कहे तू समझ जाए,
ये भी मैं चाहती नहीं।
कहने को तो बहुत बातें है...
ज़हन में मेरी,
क्या कहूँ, कैसे कहूँ
कभी समझ आता नहीं..
बांध लूँ या छोड़ दूँ,
पा तुझे सकती नहीं,
खोना मैं चाहती नहीं....
©piksa
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