देश में रोज होते हादसे 1 प्रतिशत मेरा है लाइनमैन हूं
सुरक्षा के नाम पर मिलती सिर्फ एक पेचकस प्लायर्स
तुम लोगों की खुशी के लिए रोज छोटा उतरता पोल
नहीं सुनता कोई पीड़ा हमारी देखते हैं दुनिया सारी
दर्द कैसा भी हो दिल में छुपाए रखना गालियां सुनना
शिकायत किससे करोगे यहां सुनता कोई किसी नहीं
सुबह निकलते हैं समस्याओं को लेकर निराकरण करे
शटडाउन में लेते हैं सुरक्षा भी रखते हैं पता नहीं क्यों
हादसे रोज हमारे साथ होते हैं कोई दिन नहीं साथी
सनी की नजरों में सिर्फ और सिर्फ काम छोड़ देता
लाइनमैन कई शिकायतें रोज करता मगर अधिकारी
तो प्रबंधन से करो शिकायत या करो सरकार से मेरी
आदत सी हो गई है रोज गाने सुनने की तुम्हारे कान
कितना कहोगे सरकार से हमारी पीड़ा जिम्मेदार
कुछ निगम में सरकारी है तो कुछ ठेकेदारी है कर्मी
सरकार हमारी नहीं सुनती रोना हमारा कोई न सुनता
ठेकेदार के कर्मचारियों की ठेकेदार कहां सुनता है रे
सिर्फ दलाली में बीत जाती है ठेकेदारी या अधिकारी
दोनों ही करते हैं शोषण कर्मचारी का सदियों से यह
कहीं हादसे होते तो इलाज भी संभव नहीं रोजाना
करोड़ों खर्च कर दिए सुरक्षा पर कर्मचारी असुरक्षित
की जिंदगी विद्युत धारा के तारों में थोड़ी सी चूक मौत
का कारण बन जाती है क्यों नहीं समझता कोई पीड़ा
हमारी क्या लाइनमैन की जिंदगी खुशनुमा कहां खुशी
रोजे हादसों से दिल घबराता है कभी सुना मेरी पीड़ा
©lawnishtha
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