खामोशियां लहरों की तरह है
कभी उठती हैं कभी दफ्ती हैं
बस खामोशियां खामोशियां
परिंदों की खामोशियां चीख
कभी उड़ती कभी ठहरते
सर्दी में ओस की बूंदे घास पर
जैसे मोतियों की सुंदर सी माला
हर तरफ चमक रोशनी खामोशी
बस लहर उमंग तरंग नाम है
खामोशियां तो खामोशियां हैं
©lawnishtha
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