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लोगों को चिंता धर्म की है आने वाले आज, कल और कल

लोगों को चिंता धर्म की है आने वाले आज, कल और कल
लोग धर्म के लिए अपनी जान दे रहे हैं अधर्म मानवता नहीं
घर बनाने के लिए रु. ईट पत्थर बजरी सीमेंट और मजदूर
मैं पति पत्नी बच्चे और खुशहाल परिवार माता-पिता रिश्ते
कल हम धर्म की चिंता करते थे और आज परिवार जरूरतें
आज हम परिवार की चिंता करते हैं और आने वाले कल में
आज धर्म अधर्म की दुकान में बंद है सिर्फ एक महामारी है
चिंता है तो सिर्फ अपनी जिंदगी,मौत,भुखमरी से लड़ने की
आज लोगों को चिंता इंसानियत की ,धर्म और मजहब नहीं
नतमस्तक हूं उन वीर योद्धाओं को जो जाति धर्म भूल कर
मानवता को सलाम करते हैं जोना भेद करता है ना विच्छेद सब कुछ है उनमें तप त्याग तपस्या अर्पण और अभिलाषा
नहीं है द्वेष मतभेद कटुता और धर्म और अधर्म मैं मतभेद मानवता के प्रति उनका त्याग और परिवार की जिम्मेदारी
कल जब तुम बच जाओगे इस महामारी समुद्र से जग में
तब शायद तुम उस धर्म की स्थापना करोगे जो नहीं था
तुम उस मानवता के स्थापना करोगे जो धर्म अधर्म मैं नहीं
तुम हमसे विश्वास उठा लेना जो तुम्हारी मानवता को नष्ट
तुम बस इतना सोच कि मानवता के लिए तुम्हारे त्याग से
इस संसार की सृष्टि का निर्माण हुआ और मानवता का
बेहतर होगा कि तुम कल आज और कल की चिंता छोड़
इस पल तुम ठहर जाओ आने वाला कल स्वयं तुम्हारा हो
तुम्हें यह नहीं कहता कि तुम धर्म छोड़ उदाहरण मत बनो
तुम्हें उस धन को अपनाना है जो उंगली मार और अशोक
बेहतर होता कि तुम धर्म की धारणा छोड़ मानवता के धर्म अगर स्थापना करना चाहते हो तो मानवता के करो मानव
बेहतर यही है कि आज धर्म को छोड़ दिया लोगों ने बीमारी
और उस धर्म को बचाने में चिकित्सा स्वास्थ्य और किसान
घर से दूर होकर आज घर याद आता है महामारी में आज
कल जो नेता कहते थे कि हम तुम्हारे लिए सब कुछ है ये
तुम्हारे इस संकट के समय सिर्फ अपनी राजनीति कर रहे
बीमारी और महामारी दोनों अमीरों द्वारा लाई गई देश में
और घुट घुट के जीने का तड़पते हुए इंसानों को भूख से
मजदूर किसान कोई लाचार है महामारी और राजनीति से
कल आज और कल यही चर्चा है देश में परदेस महामारी
और चर्चा है तो सिर्फ भुखमरी बीमारी और मानवता की
अब आने वाला कल है तो सिर्फ बेरोजगारी अर्थव्यवस्था अब चिंता इस बात की है कि अर्थव्यवस्था कैसे सुधरेगी
जहां योजनाएं बनाने से पहले उन को अमल जरूरी होता
मगर यहां तो योजनाएं युद्ध महायुद्ध और राजनीति की थी
कहां से यह संकट आया जिसने मानवता को झकझोर दि
अभी वक्त है संभल जाओ आंधी के बाद तूफान व सुनामी
शुक्रगुजार हूं उन योद्धा का निस्वार्थ, निष्ठापूर्वक मानवता
जिन्होंने प्राणों की आहुति तक दे दी सिर्फ मानवता बचाने
©lawnishtha