की खिल गई है कालिया, सज गई है मेहफिले
देखो माहे रमज़ान आगया।
की देने हिस्सा अल्लाह के सजदो में नेकियों और नमाज़ का अली के घर से फरिश्तों का पैग़ाम आगया।
कि हम अपनी मोहब्बत का मोहम्मद से कुछ इस तरह एलान करते हैं, रमजान के महीने में सहरी से इफ्तीयार तक उसको पांच वक्त की नमाज में याद करते हैं।
©rishab
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