ये जो मेरी माँ है, यही तो मेरी जाँ है,
इसके जैसा दुनिया मे कोई और कहाँ है।
तुम धूप में ठण्डी छाँव हो,
तुम ही इस दरिया में बस एक नाव हो।
जो तुम्हारा स्पर्श मात्र हो जाए,
तो सारी पीड़ा मिट जाए।
ये जो तेरी ममता है, ना इसकी कोई छमता है।
माँ तेरा ये बेटा तो बस तेरी भक्ति में रमता है।
प्रतिदिन मां की सेवा करे, हर दिन माँ का होता है,
जब माँ को कष्ट होता है, तो तेरा बेटा भी मन ही मन रोता है।।
पं. प्रशान्त दुबे
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