जब टूटती थी प्लेट, बचपन में तुझसे
अब मां से टूट जाए ,तो कुछ मत कहना।
जब मांगता था गुब्बारा, बचपन में मां से
अब मां चश्मा मांगे ,तो कुछ मत कहना।
जब डांटती थी मां, शरारत होती थी तुझसे
अब वह सुन ना सके, उसे बुरा मत कहना।
जब चल नहीं पाता था, मां पकड़ के चलाती थी
अब चल ना पाए वो, तो उसे सहारा तुम देना।
जब तू रोता था, मां सीने से लगाती थी
अब सह लेना दुःख तुम, मां को रोने ना देना।
जब पैदा हुए थे तुम, तब मां तुम्हारे पास थी
जब अंतिम वक़्त हो, तो तुम उसके पास रहना।
©loveheart
L