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मां की हकीकत

मां की ममता देखूं तो ,
वो निराली होती है ।
मां से बढ़कर इस दुनिया में ,
अनमोल कुछ ना होती है ।
थक जाऊं मैं अगर तो ,
मां मुझे सहलाती है ।
जब देखूं आंखों में उसके ,
सारे दुख दूर हो जाते हैं ।
मैं कमजोर बन जाऊं तो ,
वो ताकत मेरी बन जाती है ।
खुद तकलीफ में होती है,
फिर भी मुझे बतलाती है ।
एक दिन भी ऐसा ना हो,
जब कॉल मां की न आती हो ।
ना उठाओ मैं अगर तो,
वो सहम सी जाती है ।
होगा बेटा कहीं तकलीफ में,
ये सोच के भगवान को तुरंत पुकारती है ।
ठीक रखना मेरे लल्ला को,
यही बात बतियाती है ।
भूल जाएंगे अगर हम,
अपनी मां की कुर्बानी को ।
जो दुख दर्द उन्होंने झेले हैं,
उनको खुशी में हम बदलेंगे ।
मां की हर बात को अब,
हम दिल से लगाए बैठेंगे ।
उनके सारे सपनों को हम,
हकीकत में करके दिखाएंगे ।
मां का प्यार झूठा नहीं होता,
यह दुनिया से बतलाएंगे ।
जन्म लूंगा हर जन्म में,
मां बेटा तेरा ही बनकर ।
खिल उठूंगा फिर से मैं,
तेरे आंगन का फूल बनकर ।
धन्य हुआ मैं मेरी मां,
ओ मेरी प्यारी प्यारी मां ।
शब्द भी कम पड़ गए हैं,
मां तेरे गुणगान में ।
तू ही फरिश्तों की दुआ है,
मां ईश्वर का सबसे सुंदर अवतार है ।
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कवि - संजय रावत
©sanjulv