अंजना सा कोई दिल की धड़कन चुराने लगा,
मेरा खाना भी मुझसे चुराके खाने लगा।
अहसास हुआ मेरा सपना मेरे अंदर पल रहा हैं,
ये सपना टूट न जाये दिल बहुत डर रहा है।
अब वो दिल की धड़कन सुनाके कहने लगा,
माँ मैं आरहा हूँ।
आते-आते कही हाथो से छोड़ न जाये,
दिल सहम ने लगा।
धीरे-धीरे वो बड़ा होने लगा माँ मैं भूखा हूँ,
खाना भी माँगने लगा।
न मन करते हुए भी सत्रह व्यंजन बना के
खुशी-खुशी खाने लगी।
वो भी अंदर ही अंदर खाने के चटकारे लेने लगा,
और खाऊंगा-और खाऊंगा अब वो ज़िद्द करने लगा।
सोते-सोते आँख खुली, वो पूरे पेट में घूमने लगा,
आज ना सो माँ मस्ती करते हैं, मुझसे कहने लगा।
अब वो दिन आगया, मेरा ख्बाब मेरे सामने आने लगा।
अब सपना सच हो गया, मेरा कान्हा आगया।
कर्ज है माँ आपकी कोख का,
एक रात आपके साथ सोके चुकाने आगया।
जा रहा हूँ माँ, मेरे कदम की तरफ अपना सिर करके
कहके जाने लगा।
अब मेरा कान्हा, मेरा सपना, मुझसे दूर जाने लगा।
सो गया गंगा की गोद मे, अपना ध्यान रखना माँ
कहके चला गया।
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