I

माँ मेरी माँ

पैदा होने पर खुद का दर्द भुला कर आँचल से लगाने वाला दूध है माँ।
खेलते खेलते चोट लग जाये तब उस पर लगाने वाला प्यार का मरहम है माँ।
गलतियां करने पर बच्चे को डांट कर खुद रोने वाला आंसू है माँ।
बुखार आ जाये तो सिरहाने बैठकर पूरी रात जागकर बदलने वाली माथे की पट्टी है माँ।
मैं कितना भी बिगड़ जाऊ पर फिर भी मुझे लाड लड़ाने वाली ममता है माँ।
खुद भूखी रहकर मुझे दोनों वक़्त खिलाने वाली रोटी है माँ।
बड़े होने पर बच्चों की गालिया सुनकर भी उसे देखकर मुस्कुराने वाली मुस्कान है माँ।
खुद कितना भी दुख सह ले पर बच्चों पर आंच ना आने देने वाली छाँव है माँ।
खुद गीले मे सोकर मुझे सूखे मे सुलाने वाला बिस्तर है माँ।
मेरी हज़ार गलतिया माफ़ कर मुझे सीने से लगाने वाला आलिंगन है माँ।
भूल जाता है बच्चा माँ को यूँ ही बिना बात के पर फिर उसके लौटने का इंतजार करने वाली आँख है माँ।
खुद बच्चे को मार लेती है गुस्से मे कई बार पर दुनिया से लड़ जाने वाली तलवार है माँ।
क्या क्या कहु माँ तेरे लिए ,तेरे बिना ये संसार अधूरा है जीवन को लिखने वाली सूत्रधार है माँ।
©04shivanya