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मानव की तलाश

मानव की तलाश

हे मानव, मैं बुला रहा हूं तुझे

मेरी बात सुन ले ज़रा, बस दो घड़ी और देर कर

तेरा हाल सुना, परेशान तू

जा फंसा जंजाल में, करू मदद तू सबर कर

लग रहा मुझे अभी, तेरी स्थिति कुछ ठीक न

गहरी लंबी सांस ले, धैर्य की रस्सी पकड़

थोड़ा वक्त तो दे मुझे, मै समस्या समाधान दूं

तू शांत हो, आराम कर, एक राहत की सांस भर

हे मानव, मैं पूछ रहा हु तुझसे

कुछ सुन मेरे सवाल को, शायद तुझे अच्छी लगे

किस ओर तू बढ़ रहा, क्या तुझे चाहिए

किस बात पे ये चेहरा बने, किस बात का बुरा लगे

किसकी आस में सारे काम बंद है

दुबारा सफर शुरू कर, बिछड़े शायद मिलने लगे

है कमी कहां तू ढूंढता और शिकायत ये किसलिए

तू काम करना शुरू तो कर, शायद जिंदगी सम्हलने लगे

हे मानव, मैं बता रहा हूं तुझे

थोड़ा सा ध्यान दे, कुछ तो समझ में आएगा

जो रोज़ तू इंतेज़ार में, बैठा रह जाएगा

वो हल तेरी मुश्किलों का, सामने कौन लाएगा

तू बिलख बिलख के रो रहा, अब आंसुओं को पोछ ले

इन बेबसी की चीख में, हौसला मौन हो जाएगा

हां समझता हूं मैं, और सोचता भी

तू अगर ठान ले नामुमकिन भी कर पाएगा...
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