वो बून रहे इस मिट्टी को
अपने खून के धागों से,
तुम बातो से ही वार करो
वो शहीद करते गोली के दागो से।
वतन के खातिर वीर जवान थर्राए भुध र
सताओ के वर्चस्व के खातिर उजड़ गया कितनो का घर।
फिकर नहीं उन जबाजो का
वो मुंह तोड़ जवाब का ऐलान करते है
कि,क्षति ना हो हमारे ताजो का।
शर्म आता इन लोगों पर,
आलस्य मन के रोगों पर
मानव हो मानव का फिकर करो
ऐसे किसी के आखो से ना अश्क गरो,
छोड़ो ये सब लड़ाई झगड़ा
शांति का तुम जिक्र करो।
©Nilesh K
N