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मा़फी

हटा दिया दिल से, दिल को मेने साफ कर दिया।
जा बेरहम यहां से, मैंने तुझको माफ कर दिया।
तुमने फर्ज से,जो अपना निकाह कर लिया,
बस दो पल कि, ईश्क कि आरज़ू में,
देखो ना मेने,खुद को, कितना तबाह कर दिया।
तुम दौर ए दुनिया के,खिदमत में चलो,
मैं खुद के हिसाब से,खुदाई मांग लु।
मैं पुरा का पुरा, तुझमें समा जाता,
पर तोहफे में,तूमने मुझसे जुदाई मांग ली।
छोड़ दिए अरमान, जिंदगी को मेने बेरंग कर दिया,
नादान, देख तेरे दर्द ने, मुझे शायर कर दिया।
ज़ख्म एहसास के, नज़रों से कहा वाकिफ हैं,
मगर तेरी परछाई ने, मुझे तार तार कर दिया।
खुद को खुद से, काफि वफा होती है,
लो मेने खुद को खुद पर कुर्बान कर दिया।
कवि:-अभय ना.ताकसांडे
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