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मासूम चेहरे

उदास चेहरों की मुस्कुराहट कौन देखता है,
जो गमों को छुपाते हैं अपनी मुस्कुराहट से,,
रोज तलाश होती है रोजगार की शहर में,
मिल जाए रोजगार अगर तो खुशनसीबी है
ना मिले रोजगार जिल्लत भरी जिंदगी है
रोज तलाशते हैं चेहरे रोजगार चौराहे पर
कभी मिलता है कभी नहीं मिलता हर दिन
मुस्कान चेहरे पर छुपाया कई गमों को है
कुछ तलाशते हैं जीवन की राहों को दिन में
एक महा से चल रहा लॉक टाउन शहर में
शहर में रोजगार के चौराहे पर आज तलाश
मासूम चेहरा मुस्कान बिखर गई कई दिनों से
कुछ लोग करते व्यवस्था भोजन की शहर में
शायद चुका है हंस ईश्वर का रूप भामाशाह
उठाया कैमरा चल दिया चौराहे की दोपहरी
तलाश उन चेहरों की थी जो मासूम थे धूप
माथे पर शिकन थी तलाश भोजन की थी
टकटकी मारे देखती रही निगाहें भोजन की
घर मिल जाएगा भोजन तो कट जाएंगे रास्ते
सैकड़ों मिलों की दूरियां दो कदमों ने छोड़ दी
बस आस अपनों के बीच में घर पहुंच जाऊं
नन्हे कदमों को देखा लोग डाउन के सफर में
कभी भूख तो कभी प्यासे से लड़खड़ाते कदम
चिंता है तो बस घर पहुंचने की मंजिल दूर है
जो मसीहा बन रहे थे मजदूरों के छुपे हैं घरों में
कहीं ना कहीं तो अफसोस जरूर होगा चुनावों
अबकी चुनावों का असर देखते ही बन जाएगा
जिसे नहीं पहुंचाया घर वह मतदान में दिखाएगा
©lawnishtha