दो पल की है ये कहानी...
नाम है इसकी "जिंदगी".
अपनों का साथ देकर हमेशा...
सुख-दुःख की मानो कश्ती है ये चलानी
सुमन की कली भी हमे बोहोत कुछ है सिखाती...
हररोज नयी उमंग के संग,नये लम्हे लेकर मै हूं खिलती.
सुरज भी जैसे अपने उज्वल किरणोंसे...
आस्मान का अंघःकार है मिटाता.
वैसे ही,मनुष्यने भी बिते कल को भूलाकर...
नये ऊर्जासे अपने जीवन को प्रज्वलित है करना.
समुद्र की लेहरों ने हमे यही है सिखाया...
जीवन में आगे बढ़ना है तो कभी झुकने की परवाह ना करना
निचे गेहराई में एकबार झुककर तो देखना...
गेहराई में भी सफलता का चमकता रास्ता नजर आयेगा.
उंचे उंचे पेढ़ोने भी मन में यह एक बात है पिरोया...
कितना भी बड़ा शिखर क्यों ना हासिल करलो.
जड़ो का अपना ये अनमोल साथ कभी भी ना छोड़ना...
जिन्होंने तुम्हे हर पल सहारा दिया,उन्हें ठुकराने की कोशिश गलतीसे भी ना करना.
इसी तरह जीवन के कुछ अद्भूत लम्हे है गुजारना...
भूलकर सारे गम को,हंसकर आगे है बढ़ते चलना.
हर छोटी चीज का आनंद लो,ना हो खुशी की कोई मर्यादा...
चलो आओ मिलकर लिखे,जिंदगी की यही एक हसीन गाथा
- प्रतिक प्रविण गायकवाड
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