H

मैं भी निर्भया......

शीर्षक - मै एक निर्भया......
लेखक - हिमांशु पन्त
जी हां मै एक निर्भया हु,, जो अपने माँ बाप की लाडली थी,, अपने परिवार की एक मात्र मै घर संभालने वाली थी !!!
बचपन से पाला मुझको धूप छाँव से संभाला मुझको,, काँटा भी न लगे देह मे इस कदर बनाया मुझको !!
छोटी सी थी खूब शरारत करती थी,, अपने पिता के कंधो मे मै खूब मस्ती से चढ़ती थी !!
दशहरे मे शाम को घूमने परिवार संग जाया करते,, रावण इतना बुरा था पिता मेरे मुझे बताया करते,, !!
अपने पैरो मे खड़ी हुई, तो लगा आसमान को चुम लुंगी,, हर ख़ुशी अपनी मुट्ठी मे चुपके से मै थाम लुंगी !!
रोज तो ऑफिस से घर आती थी,, फिर आज अचनाक क्या हुआ,, शायद सब कुछ मुझसे छीन जाएगा कुछ ऐसा सा एहसास हुआ !!
ऑफिस से निकली थी कुछ कदम ही चली थी,, 4 दरिंदो के रूप मे आज मेरी मौत मेरे सामने खड़ी थी !!
पहले ने धमकाया मुझको, दूसरे ने डराया मुझको, क्या करना चाहते थे वो ये ना समझ मे आया मुझको !!
मैंने भागने की लाख कोशिशे की, उनकी कैद से दूर ना हो पायी मैं,,, ऐसा क्या गुनाह किया मैंने ये समझ ना पायी मैं !!
अब नोचना शुरू किया दरिंदो ने अब मैं सोचने की हालत मे नहीं,, दर्द होता है मुझको मेरे माँ बाप भी आज मुझे बचाने वाले नहीं !!
किसको लगाऊ गुहार मदद की मुझमे अब नहीं सहा जाता,, छोड़ दो मुझे बस मुझसे अब यही कहा जाता !!
पर उन्होंने मेरी एक न सुनी पाप मे पाप करते रहे ,, बीच सड़क मे आज खुलेआम वो मेरा बलत्कार करते रहे,, !!
हार गयी मैं हार गयी मुझे मेरी साँसों ने बता डाला,, उन दरिंदो ने आज मुझे जिन्दा ही जला डाला !!
अब कैसे जाउंगी घर घड़ी मे 8 बजते ही होंगे,,, दरवाजा खोल मेरे पापा आज भी रोज की तरह मेरी राह देख रहे होंगे !!
अब उनसे ये कहना इस सन्देश के माध्यम से की मैं अब नहीं आउंगी कर दो बंद दरवाजा अब पापा पापा नहीं बोल पाऊँगी !!
मेरी सभी से गुजारिश है,, मुझे और मेरे घर वालो को इंसाफ दिला दो,, मोमबत्ती जलाने से अच्छा उन दरिंदो का सिर जिन्दा जला दो !!
ना हो तुमसे कुछ अगर, तो सीधा सीधा बता देना 6 महीने की निर्भया को भी साड़ी पहनना सीखा देना !!
मेरी इतनी विनती है की जितना दर्द मैंने सहा उस से दुगना दर्द वो सहे,, ऐसा बना दो कानून की हर बलात्कारी बलात्कार करने से डरते रहे !!
आभार मानूंगी मैं तुम्हारा बस इतना काम कर देना,, उन दरिंदो की हिम्मत न हो दोबारा बस ऐसी सजाए मौत देना !!
जाते जाते सिर्फ इतना ही बोलना चाहूंगी उन दरिंदो की मौत मैं ऊपर से देखना चाहूंगी !!
बस अब चलती हु मेरा ये सन्देश पूरा हुआ,, दरिंदो को मिले कड़ी सजा इसकी मैं भी करूंगी दुआ !!
©himanshup