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मैं एक फ़ौजी

शीर्षक - मैं एक फ़ौजी
लेखक - हिमांशु पन्त
" उम्र 19 की जज्बा कुछ करने का
मन बनाया मैंने फ़ौज मे भर्ती होने का " !!
" तैयारी ट्रेनिंग सब कर ली और पास कर ली परीक्षा भी
दुशमन को मार गिराना है बस यही मैंने शिक्षा ली " !!
" लेकर माँ पिता का आशीर्वाद देवी देवताओं को भी याद किया,, 20 की उम्र मे मुझे मेरे जज्बे ने कश्मीर मे तैनात किया " !!
" याद माँ पिता की बहुत आती बस चुपके से याद करता हु,, आँखों मे आंसू आते अब खुद ही साफ करता हु "!!
"भूल कर अब यादे घर की अब सीमा मे तैनात हुआ
अचानक उस रात युद्ध का ऐलान हुआ "!!
" सवाल देश सेवा का था तो कैसे कमजोर पड़ जाता
माँ भारती के लिए अच्छे अच्छो से लड़ जाता" !!
" चारो तरफ सिर्फ युद्ध और सिर्फ गोलीबारी थी
इस युद्ध मे तिरंगा फहराकर विजय पाने की तैयारी थी "!!
"मैंने अंत समय तक लड़ना चाहा पर किस्मत ने साथ ना दिया,, बंद आँखों से मैंने माँ भारती को सलाम किया" !!
"माँ तुझसे कुछ पल को ही दूर हुआ अब तिरंगे मे घर आऊंगा,, एक साथ अब मैं दो माताओ का बेटा कहलाऊंगा" !!
" पिताजी हौसला ना तोड़ना बस आखिरी इच्छा पूरी कर देना,, मेरे समान मेरे छोटे भाई को भी फ़ौज मे भर्ती कर देना !!
" मेरे सपने को अब मेरा भाई आगे बढ़ाएगा,, दुश्मन को फिर एक बार धूल चटाकर तिरंगे को लहराएगा" !!
©himanshup