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“मैं ही कहानी हूँ”💖🔥✨

“मैं ही कहानी हूँ”💖🔥✨

मेरे वजूद की तफ़सील

लफ़्ज़ों में बयां नहीं होती,

मैं वो ख़ामोशी हूँ

जो हर शोर पर भारी होती।

मेरी रूह की गहराइयों में

एक सैलाब पलता है,

हर ज़ख़्म मेरे अंदर

एक इंक़लाब बनकर ढलता है।

तुमने मुझे हर मोड़ पर

कमतर ही आँका है,

मेरी उड़ान को तुमने

ज़मीं तक ही बाँधा है।

मगर मेरी फ़ितरत में

रुकना लिखा ही नहीं,

मैं वो दरिया हूँ

जो रास्ता खुद बना लेती हूँ कहीं।

मेरे सब्र की हद को

अब और मत आज़माओ,

मैं ख़ामोश ज़रूर हूँ

मगर मुझे कमज़ोर मत बताओ।

मेरी तिश्नगी, मेरा जुनून

अब लफ़्ज़ों में ढल रहा है,

जो मुझे मिटाने चले थे—

उनके सामने ही मैं निखर रही हूँ।

अब जो उठी हूँ मैं,

तो ये इरादा अटल है—

मैं हार की दास्तान नहीं,

ख़ुद एक मुकम्मल ग़ज़ल हूँ।
#PoeAwards#Poemia