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मैं जीने लगी तेरे प्यार से!

अधूरी हर चाहत का...,
एक इतिहास था
जो पूरी न हो...,
ऐसी एक आस था
अब मैं जीने लगी तेरे प्यार से
अब कुछ न चाहूँ इस संसार से!
प्रियाप्रिंसेस पवाँर
स्वरचित,मौलिक
सर्वाधिकार सुरक्षित
dwarkaNewdelhi78
©Priyaprinc