मैंने लोगों को मूर्ख बनाया
तूने खेत में अनाज उगाया
तेरी मेहनत का फल ना मिला
तू भुखमरी और कर्ज उधारी में
रहमते सरकार की जिंदा रहे
फसल का मूल पूरा ना मिला
यह सरकार जानती है दलाली की
आज तूने हैं देश को जिंदा रखा
खून चूसा व्यापारी और दलालों ने
मेहनत मजदूरी तूने करी परिश्रम
इच्छाओं को घर करने ना दिया
तूने मेहनत करी फल मुझे मिला
आज खामोश है सरकारें देश की
तूने चुन के नेता भेजें माटी पुत्र नहीं
जो नफरत ए हिंद फैलाते हैं वो क्या
मैं मंदिर में बैठा रहा उपदेश देता रहा
मेहनत मजदूरी ना करने की जहमत
तुम्हारे टुकड़ों पर पलता हूं मैं जानते हो
मैं वही पुजारी हूं जो धर्म फैला था
मगर मैं नहीं फैलाता इंसानियत क्यों
जिस पर चलता है मेरा घर नफरतें
अपना धंधा चलाने को नफरत है फैलाई हैं
कैसे छोड़ दूं यह नफरत है रोजगार मेला
बिना मेहनत के जो मिला मुझे आज तक
मैं पुजारी मंदिर का तू प्रकृति का पुजारी
©lawnishtha
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