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मैं तेरा कान्हा तू मेरी राधा है

मोहब्बत को दूरियों ने, कहाँ बाँधा है
नया आशिक़ हूँ, अभी आशिकी का इरादा है।
मैं तेरा कान्हा तू मेरी राधा है।
नया नया है अपने मोहब्बत का शहर ,
मोहब्बत की गलियों में कहाँ कोई प्यादा है
यहाँ तो हर शख्श अपनी रानी का राजा है ।
दूँगा हर खुशी, रोज-रोज किया ये वादा है ,
सबकी अपनी कहानी है, सबका यही इरादा है,
मैं तेरा कान्हा और तू मेरी राधा है।
प्रेम की गलियों में रहकर , अपनी मंज़िल को पाया है।
भूल के सारी दुनिया को, सिर्फ तुमको ही अपनाया है।।
मन की नजरों में झांक के तुम्हारे , दिल भी मेरा जगमगाया है।
अब न जाऊंगा दूर कभी , तब किया ये वादा है,
मैं तेरा कान्हा, तू मेरी राधा है।
मैं तेरा कान्हा ....................
जो सोचा भी न था , वो वक़्त आया है,,
मजबूरियों ने दूरियों को बढ़ाया है।। लेकिन
कोई पास मेरे हो या न हो , तुम्हे हरदम अपने पास ही पाया है ।
खुश रहता हूं तेरी यादों के साथ हमेशा , फिर भी चांदनी रात में सूखी आंखों में पानी आया है
मैं तेरा कान्हा तू, मेरी राधा है।
मैं तेरा कान्हा ....................
तेरी तस्वीर के इत्र से , मैंने अपना मन महकाया है,
और अनसोई रातो में मन तुमसे यही बतिआया है,
कि आज फिर दूर है,और जल्द मिलेंगे , बहुत बार किया ये वादा है।
हा तेरी प्रेम निशानी को देखकर , दिल यही गुनगुनाया हैं,
मोहब्बत को दूरियों ने कहाँ बाँधा है,
मैं तेरा कान्हा और तू मेरी राधा है।
मैं तेरा कान्हा ..........................
©sanj