मैने
लुटा तो खुद को, खुल कर लुटाया मैंने
किसी का भी सिक्का,नहीं उठाया मैंने
मेरी खाली जेब, सबूत है इस बात का
पैसे कम पर ज़्यादा, इश्क़ कमाया मैंने
हुज़ूम में थे,दो चार मेरे दुश्मन कम
फिर अपने, दोस्तों को आज़माया मैंने
दरिया ने बनाई थी मेरी, गलत तस्वीर
एक रोज शीशे को,शीशा दिखाया मैंने
मजबूर किया गम ने खुदखुशी के लिए
फिर खुद की खुशी का,गला दबाया मैंने
लुटा तो खुद को, खुल कर लुटाया मैंने
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