बसंत की हल्की सी धूप में,
खिलते हैं फूलों के रंग,
मन में भर देते हैं उमंग।
गर्मी का सूरज जब चढ़ता है,
पंछियों की चहचहाहट फिर भी बसती है,
आमों की मिठास में जिंदगी खिलखिलाती है।
वर्षा रानी जब आती है,
हरियाली अपनी चादर फैलाती है,
धरती की प्यास बुझाती है।
शरद की खुशनुमा शाम में,
हल्का ठंडा स्पर्श, गरम चाय के साथ,
मित्रों की गर्मागर्म बातें, मन को भाती हैं।
हेमंत की ठंडी सुबह में,
कुहासे में लिपटी सुबह,
लाती है मेहमानों की तरह खुशियों की सौगात।
सर्दी की लम्बी रातों में,
आग के पास बैठ, कहानियों का आदान-प्रदान,
जीवन को एक नया आयाम देता।
ऋतुएं आती-जाती रहती हैं,
जीवन की इस यात्रा म