S

मे हू ही ऐसी ....

हस हसकर कहूँगी मे तो क्योंकि , मे हू ही ऐसी....
लोग जळ जाते है मेरी मुस्कान पर क्योकी
मेने कभी दर्द की गुंजाइश नही की...
जिंदगी से जो मीला वो ले लिया मेने
कभी किसी चीज की फरमाईश नही की
बहुत मुश्किल है मुझे समजना
क्योकी जिने के अलग अंदाज है मेरे
जब जहा जो मिला उसे अपणा लिया
और जो ना मिला उसे पाने की ख्वाईश नही की
हा ये सच है के कुछ ज्यादा पाया नही मेने
पर खुद पर नाज़ है मुझे कभी खुद को गिराकर कुछ उठाया नही मेने
मे तो क्योकी , मे हू ही ऐसी.....मे हू ही ऐसी.....
written by
sanjana mandu
©sanjii