दुनिया के मेले और हम अकेले
जो ना सीखे वो खेल हमने खेले
क्या क्या ना सोचा क्या ना चाहा
आगे बड़े , तो वापस हमें धकेले
तूफान ए ग़म में बहते नहीं हम
आजमाइशों के थपेड़े है हमने झेले
हार में जो मज़ा वो जीत में कहा
बाजीगरी के कुछ सबक हमसे लेले
अपने पराए के फेर में ना पड़ शाहिद
अजनबी है अपने , और अपने सौतेले
©shahidkhan
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