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मेरा मुल्क

मेरा मुल्क आज
रूका रूका सा दिखता है
क्यो़कि
दुनिया का माहौल ही
आज कुछ ऐसा है,
एक वायरस ने
ऐसी शैतानियत
दिखाई है,
जिससे पूरी इंसानियत
में एक कोहराम
सा मचा दिखता है,
सूने शहर,सूने रास्ते
सूनी गलियां
हर म़ंदीर के हर देवता
के द्वार पर
बडा सा ताला दिखता है,
पर बाहर तो उनका (भगवान)
दूत हमारी हर जरूरत
में खडा दिखता है,
सहमें-सहमें
से दिखते है लोग,
पूंछते हैं कि भगवान
इस मुसिबत में
तू कहां रहता है,
तो भगवान का यही
जवाब होता है "हे!
मानव तू तो अभी घर
में कैद है और मै तो
उस अस्पताल में
जहां कराह की
आवाज आती है,
उन डॉक्टरों में
मेरा बसेरा होता है
,सवाल कई ,
जीने की चाहत है,
पर मौत का गम
भी दिलं के किसी
कोने मे पडा सा रहता है
कई जिंदगियों ने
आज पहली बार
ऐसा मंजर देखा है,
,हंसना मना है, इसे आज
आजमाते देखा है,कभी
‌किसी मरीज को ठिक
होने की खबर आते ही
दिलं बाग -बाग हो उठता है,
किसी की मौत से ,
दिल सहम सा जाता है,
आज उम्मिद पे
दुनिया कायम है,
इसी आसं पर जी
रहें हैं हम, इस मुये
कोरोना के आने के पहले,
भी हमारी
जिंदगी में क्या? कम थे गम!
सन्नाटा छटेगा,खुशीयां होंगी
वहीं शोरगुल,
रौनक वापस आयेगी.
, इसी आस पर हर
आदमी जीता हुआ सा
.दिखता है,आज
इस पर यकीन करने
का भी मन करता है.

©manasvi...