N

मेरे दिमाग में तस्वीरें कुछ यूँ सजती हैं, खामोश ख्वाबों में रंग बनकर बसती…

मेरे दिमाग में तस्वीरें कुछ यूँ सजती हैं,
खामोश ख्वाबों में रंग बनकर बसती हैं।
हर याद की रेखा दिल को छू जाती है,
बीती हुई बातें फिर से मुस्कुराती हैं।
कभी धुंधली, कभी साफ नज़र आती हैं,
ये तस्वीरें ही तो मेरी दुनिया बन जाती हैं।