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मेरे एहसास

सोच रहा हूं गालिब ही बन जाउ, आशिक़ बनके देख ली हमने।
वाह वाह तो तब भी होती थी, लेकिन फर्क इतना था कि वहां चर्चे मेरे मोहबत्त की थी , लेकिन अब चर्चे मेरे बिगड़ने के है।
©darshan_y1