P panditrish hi 23 जुलाई 2025 मेरे एहसास, मेरी कवितायेँ। मेरे अल्फ़ाज़ को समझो मेरे जाना मेरे दिलबर,मेरा ये दिल धड़कता है, तेरे खातिर मेरे दिलबर, मेरा चेहरा तेरी बातों से अब तो मुस्कुराता है, मेरी चाहत को तुम समझो, मेरे जाना मेरे दिलबर।©panditrish