D diyadeepak hi 23 जुलाई 2025 मेरे शब्द रात की अंधियारी देखते हुए,सुबह का इंतज़ार करते हैचमकते हुए सितारों के बीच,चांदनी की मांग करते है ___Durga(Diya)©diyadeepak