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मेरी आदत..!!

मेरी सुबह कुछ आदतों से शुरू होती है
अपने से पहले उसकी खुशियों की इल्तज़ा होती है
हर काम जो मैं करता नही बस यू ही हो जाता है
मेरा मन उसकी इफाजत में बस खो जाता है
ना खुदा समझ पाता ना वही समझ पाती
सुबह से शाम क्या होती वह क्या जान पाती
कई रातें तो चांदनी को भी छुपा लेती और तारे भी
हां कई देती है पर कुछ आधे अधूरे , कुछ तारे भी
फिर भी इंतजार का बादशाह हूं मैं ये मानना पड़ेगा
मेरे मेहनत की रात पूनम होती है.. खुदा भी है वह भी है यह मानना पड़ेगा..!!
महीने की बाकी रातें बेकार लगती है जब यह रात आती है
कितना रोता हूं कितना सोचता हूं जब यह रात अलविदा कहती है
मेरा इंतजार मिलता तो है पर मेरा नहीं होता है
कुछ पल खुशियां देकर फिर इंतजार ही होता है

©Hari om