मेरी कलम में वह धार नहीं,
कि शिक्षा का मशाल विश्व में जगा सकूं,
ज्ञान की अलख जनजन तक पहुंचा सकूं,
मेरी कलम में वह धार नहीं ।
मेरी कलम में वह धार नहीं,
जिससे कलम की शक्ति की ऐहसास करा सकूं,
भ्रष्टनेताओं के काले करतूतों को उजागर कर सकूं,
मेरी कलम में वह धार नहीं ।
मेरी कलम में वह धार नहीं,
जिससे जिहादी के हृदय में प्रेम की गंगा बहा सकूं,
आतंकी आँकाओं को कलम की बमों की धमाकों से जहन्नूम पहुंचा सकूं,मेरी कलम में वह धार नहीं।
मेरी कलम में वह धार नहीं,
मानव को मानव बना सकूं,
प्रेम-सौहार्द जनजन में जगा सकूं,
मेरी कलम में वह धार नहीं।
-------- संदीप कुमार "संजन"
भगवानपुर,अररिया,बिहार
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