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मेरी उड़ान

मेरी उड़ान
पंख मिले तो उड़ जाऊँ
नीले गगन में खो जाऊँ।
चांद छूने के नहीं हैं अरमान
मगर छूना जरूर है आसमान।।
आए कितनी भी मुश्किलें
पीछे न हूं, उड़ती रहूँ
लेकर सारा जहान
भरूँ मैं ऐसी उड़ान। ।
रौनकें हो हर तरफ
रौशनी हो हर तरफ
खुशियाँ झूमें सबके आंगन में इस कदर
ना रहे कोई डर, कि मच जाए ना कहर
बंधे ऐसा समां
कि रोके ना रूकूँ
भरूँ मैं ऐसी उड़ान।।
-----सुरभी
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