ये भूख ना जान, ले रही
और ना ही मार रही है
एक रोटी के तिनके के लिए तरस गया_(2)
ये पेट की आग, जो बरस रही है ,
मेरी जान है तेरे हाथों में तरस रही है
तू मौत दे दे हमें महामारी 2)
यही है गुजारिश हमारी
है महामारी,
है महामारी
जान ले ले तू हमारी........
_Durga(Diya)
©diyadeepak
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