मित्रता क्या है, पूछो तो कहीं कोई परिभाषा नहीं,
हाँ, वो एक अनकही समझ है, विश्वास की राह में खिला एक दीप है।
जहाँ शब्दों की नहीं, अनकहे भावों की भाषा है,
और निःस्वार्थ प्रेम की अगाध वेदी पर,
ढेरों सपने, आशाएँ, और यादें पलती हैं।
वो मित्रता, जहाँ दूरियाँ भी नजदीकियाँ लगती हैं,
और साथ ना होते हुए भी, हर पल साथ होने का एहसास देती है।
जहाँ एक मुस्कान में उम्र भर का साथ और,
एक आंसू में समुंदर भर का सुकून निहित है।
मित्रता, वो विशाल आसमान है, जहाँ फरिश्ते उड़ान भरते हैं,
जहाँ लड़ाइयाँ भी प्यार से जिती जाती हैं,
और खामोशियाँ भी गीत सुनाती हैं।
इस मित्रता के महल में, हर कोने में खुशियाँ बसती हैं,