जब सच के संग खड़े हो तुम
धड़कन में बसते हो हर दम
हाथ थामे, मुस्कान बिखेरते
दुख-सुख में साथ निभाते
कभी मौन, कभी शोर में
तुम हो साथी हर ओर में
बिना शब्दों के समझते
अरमानों को महकाते
झगड़े, फिर मनाते भी
अपनी प्रीत दृढ़ रखते भी
विश्वास की डोर है मजबूत
प्यार है शाश्वत, निःशुल्क