उन पंखों पर उड़ान, जो हमने साथ मिल के फैलाए,
मित्रता की उन गलियों में, सपने सजाए, खुशियाँ लाए।
राह में आई कठिनाइयाँ, पर साथ ना छोड़ा हमने,
एक दूसरे की हंसी में, अपनी खुशियाँ तोला हमने।
कभी रोशनी में साथ नाचे, कभी अंधेरे में मुस्कुराए,
मित्रता के इस महल में, दूर तक साथ चले आए।
फासले आए, दूरियाँ बढ़ीं, पर दिल ना कभी दूर हुए,
यादों के झरोखों से हम, एक दूसरे को और भी पूरा किए।
मित्रता के इस पंखों पर, सच्चाई के रंग भरके,
एक दूसरे के लिए हमेशा, हौसलों के संग उड़े।